लखनऊ में 2018 के चर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड में आज, 21 सितंबर को अदालत पूर्व सिपाही प्रशांत चौधरी की सजा पर फैसला सुनाएगी। जिला एवं सत्र अदालत ने 17 सितंबर को प्रशांत चौधरी को गैर-इरादतन हत्या का दोषी माना था, जबकि मामले में आरोपी दूसरे सिपाही संदीप कुमार को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर बरी कर दिया था।
करीब आठ साल से चल रहे इस मामले में अंतिम बहस 6 अगस्त को पूरी हुई थी। अब अदालत यह तय करेगी कि दोषी पाए गए प्रशांत चौधरी को कितनी सजा दी जाए।
विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी ने दोषसिद्धि के बाद फैसले पर असंतोष जताया था। उनका कहना था कि वह अदालत से अपेक्षित न्याय की उम्मीद कर रही थीं। उन्होंने यह भी कहा था कि वह फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख करेंगी।
क्या है पूरा मामला?
29 सितंबर 2018 की देर रात एप्पल के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी अपनी महिला सहकर्मी के साथ कार से लौट रहे थे। गोमतीनगर विस्तार के मकदूमपुर इलाके में बाइक सवार पुलिसकर्मियों ने उनकी कार को रोकने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार, कार नहीं रुकी और टक्कर की स्थिति बनी, जिसके बाद प्रशांत चौधरी ने गोली चला दी।
गोली लगने से विवेक गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। घटना के बाद मामला काफी चर्चा में आया और पुलिसकर्मी प्रशांत चौधरी को बर्खास्त कर दिया गया था।
आठ साल में कैसे आगे बढ़ा मामला?
विवेक तिवारी की मौत के बाद यह मामला देशभर में चर्चा में आया था। पुलिस जांच के बाद बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी और सिपाही संदीप कुमार के खिलाफ मुकदमा चला। 22 मार्च 2019 को प्रशांत के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 और 323 के तहत आरोप तय किए गए थे। संदीप पर भी हत्या से जुड़े आरोप लगाए गए थे।
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने आठ गवाह पेश किए। बचाव पक्ष की ओर से भी फोरेंसिक विशेषज्ञों समेत आठ गवाहों के बयान कराए गए। दोनों आरोपियों के बयान 26 नवंबर 2024 को सीआरपीसी की धारा 313 के तहत दर्ज किए गए थे। इसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ी और 6 अगस्त 2026 को अंतिम बहस पूरी हुई।
हत्या की धारा में दोषी नहीं माना गया
17 सितंबर को अदालत ने प्रशांत चौधरी को हत्या की धारा 302 के बजाय आईपीसी की धारा 304 के तहत गैर-इरादतन हत्या का दोषी माना। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने इसे ऐसा मामला माना जिसमें मौत कारित करने की जानकारी होने के बावजूद हत्या करने की मंशा का निष्कर्ष नहीं निकाला गया। वहीं, संदीप कुमार को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।
आज अदालत तय करेगी सजा
अब 21 सितंबर को अदालत प्रशांत चौधरी की सजा की अवधि तय करेगी। अदालत ने दोषी को जेल से पेश करने के निर्देश दिए हैं। सजा कितनी होगी, यह अदालत के आज के आदेश में स्पष्ट होगा।
परिवार ने फैसले के खिलाफ अपील की बात कही
दोषसिद्धि के बाद विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी ने फैसले पर असंतोष जताया था। उन्होंने कहा कि वह मामले को उच्च न्यायालय में चुनौती देंगी। इस तरह आज आने वाला सजा संबंधी आदेश इस आठ साल पुराने मामले की न्यायिक प्रक्रिया में एक और महत्वपूर्ण चरण होगा।
घटना के बाद पुलिस विभाग में भी हुई थी कार्रवाई
29 सितंबर 2018 की रात हुई घटना के बाद प्रशांत चौधरी को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। विवेक तिवारी की मौत के बाद मामले की जांच और पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी। अब करीब आठ साल बाद निचली अदालत में दोषसिद्धि के बाद प्रशांत की सजा पर फैसला होना बाकी है।
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