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फर्जी B.Ed प्रमाणपत्र का खुलासा: 16 साल बाद अध्यापिका की नौकरी रद्द, सेवा समाप्त

  • बीएसए ने नियुक्ति तिथि से नियुक्ति शून्य घोषित की, अब तक मिले वेतन की होगी रिकवरी
आजमगढ़। जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) राजीव पाठक ने नगर क्षेत्र स्थित बालक उच्च प्राथमिक विद्यालय बदरका में कार्यरत सहायक अध्यापिका रीता गौड़ की नियुक्ति को नियुक्ति तिथि से ही शून्य घोषित करते हुए उनकी सेवा समाप्त कर दी है। साथ ही उनके द्वारा अब तक आहरित किए गए समस्त वेतन की रिकवरी के भी निर्देश दिए गए हैं। बीएसए द्वारा जारी आदेश के अनुसार, रीता गौड़ पुत्री विश्वनाथ प्रसाद निवासी अनंतपुरा (कटरा), सदर, आजमगढ़ की नियुक्ति वर्ष 2010 में तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के आदेश के तहत प्राथमिक विद्यालय कोटवा, शिक्षा क्षेत्र रानी की सराय में हुई थी। वर्तमान में वह बालक उच्च प्राथमिक विद्यालय बदरका, नगर क्षेत्र में तैनात थीं।
नियुक्ति आदेश में स्पष्ट शर्त थी कि यदि अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत शैक्षिक, प्रशिक्षण अथवा अन्य प्रमाणपत्र जांच में फर्जी या कूटरचित पाए जाते हैं तो नियुक्ति स्वतः निरस्त मानी जाएगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अभ्यर्थी की होगी। मामले की शुरुआत भदुली गांव निवासी शंकर प्रसाद योगाचार्य की शिकायत से हुई। उन्होंने आयुक्त, आजमगढ़ मंडल को पत्र भेजकर आरोप लगाया कि रीता गौड़ ने कूटरचित बीएड अंकपत्र एवं प्रमाणपत्र के आधार पर शिक्षक पद प्राप्त किया है। शिकायत के साथ सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त स्वामी देवानन्द स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मठलार (देवरिया) के पत्र की प्रति भी संलग्न की गई थी।
महाविद्यालय द्वारा आरटीआई के तहत दिए गए जवाब में बताया गया था कि रीता गौड़ के नाम से प्रस्तुत बीएड वर्ष-2003 का अंकपत्र संस्थान द्वारा जारी नहीं किया गया है। पत्र में यह भी उल्लेख था कि उस वर्ष विश्वविद्यालय द्वारा आवंटित अनुक्रमांक 192732 तक ही अभिलेखों में दर्ज हैं, जबकि प्रस्तुत अंकपत्र पर अनुक्रमांक 192735 अंकित है, जो अभिलेखों से मेल नहीं खाता। शिकायत के आधार पर जनवरी 2025 में बीएसए कार्यालय ने रीता गौड़ को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा। जवाब में उन्होंने अपने प्रमाणपत्रों को सही बताते हुए पक्ष रखा। इसके बाद 3 फरवरी 2025 को महाविद्यालय से प्रमाणपत्र का सत्यापन कराया गया। 17 मार्च 2025 को प्राप्त रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि रीता गौड़ का नाम, पिता का नाम, अनुक्रमांक, परीक्षा वर्ष और अंक विवरण संस्थान के अभिलेखों में उपलब्ध नहीं हैं।
हालांकि 4 जून 2025 को महाविद्यालय के नाम से एक अन्य सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त हुई, जिसमें उनके विवरण को सही बताया गया था। दोनों रिपोर्टों में विरोधाभास सामने आने पर बीएसए कार्यालय ने पुनः स्पष्टीकरण मांगा। इस पर महाविद्यालय के प्राचार्य ने 13 जून 2026 को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया कि 17 मार्च 2025 की रिपोर्ट ही सही और आधिकारिक है, जबकि 4 जून 2025 को जारी कथित सत्यापन पत्र संस्थान द्वारा जारी ही नहीं किया गया था। प्राचार्य ने बताया कि उक्त पत्र का डिस्पैच नंबर, हस्ताक्षर और मुहर कूटरचित एवं फर्जी हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रीता गौड़ के नाम से बीएड-2003 अनुक्रमांक 192735 का कोई अभिलेख संस्थान में उपलब्ध नहीं है।
महाविद्यालय से प्राप्त अंतिम सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने रीता गौड़ की नियुक्ति को नियुक्ति तिथि से शून्य घोषित करते हुए उनकी सेवा समाप्त कर दी। साथ ही वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा) तथा खंड शिक्षा अधिकारी, नगर क्षेत्र को निर्देशित किया गया है कि शिक्षिका द्वारा अब तक आहरित समस्त धनराशि की रिकवरी सुनिश्चित की जाए। इस कार्रवाई के बाद बेसिक शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, अब अन्य संदिग्ध शैक्षिक प्रमाणपत्रों की भी गहन जांच कराए जाने की संभावना है।

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