आजमगढ़। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक दावा सामने आया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश सरकार में मंत्री Om Prakash Rajbhar ने समाजवादी पार्टी को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। राजभर का कहना है कि जिस तरह All India Trinamool Congress और Shiv Sena में बड़ी टूट हुई, उसी तरह अब समाजवादी पार्टी में भी बड़ी टूट होना तय है।
अतरौलिया में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के कई सांसद भाजपा के संपर्क में हैं और आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है और यह जल्द ही खुलकर सामने आएगा। राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी में नेताओं और कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि कई वरिष्ठ नेता स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, जिसका असर भविष्य में पार्टी की एकजुटता पर पड़ सकता है।
हालांकि बड़ा सवाल यह है कि क्या वास्तव में समाजवादी पार्टी में टूट होने वाली है?
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो फिलहाल समाजवादी पार्टी के किसी सांसद या बड़े नेता द्वारा पार्टी छोड़ने का कोई सार्वजनिक संकेत नहीं मिला है। राजभर के बयान को राजनीतिक दबाव बनाने और विपक्ष पर हमला बोलने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। दूसरी ओर सपा नेतृत्व लगातार यह दावा करता रहा है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और भाजपा गठबंधन के नेता भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।
सवाल यह भी है कि क्या टीएमसी और शिवसेना जैसी परिस्थितियां समाजवादी पार्टी में मौजूद हैं? शिवसेना और टीएमसी में टूट के पीछे अलग-अलग राजनीतिक और संगठनात्मक कारण थे, जबकि समाजवादी पार्टी फिलहाल Uttar Pradesh में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में है और उसका संगठन अभी भी मजबूत माना जाता है।
ऐसे में यह कहना कि “सपा का कुनबा 100 प्रतिशत टूटना तय है”, फिलहाल एक राजनीतिक दावा भर है। इसकी सच्चाई आने वाले समय में ही सामने आएगी। यदि समाजवादी पार्टी के सांसद या बड़े नेता वास्तव में पार्टी छोड़ते हैं, तब राजभर का दावा सही साबित हो सकता है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।फिलहाल इतना जरूर है कि राजभर के बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और सभी की निगाहें अब समाजवादी पार्टी की आंतरिक स्थिति पर टिकी हुई हैं।
News Wani
