फतेहपुर। इस्लाम धर्म में मुहर्रम के महीने को शहादत, सब्र और कुर्बानी के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है। मुहर्रम का चांद दिखाई देने के साथ ही कर्बला के 72 जांनिसारों की याद में पूरे माहौल में गम और अकीदत का रंग नजर आने लगता है। गांवों और शहरों में एक मुहर्रम से ही शहादतनामा और कर्बला की दास्तान का सिलसिला शुरू हो जाता है, जो 10 या 12 दिनों तक जारी रहता है। शिया और सुन्नी दोनों समुदायों के लोग हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत को अकीदत के साथ याद करते हैं। इसी क्रम में खागा तहसील क्षेत्र के सुल्तानपुर घोष में आठ दिवसीय शहादतनामा कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत कर्बला की घटनाओं पर आधारित तकरीरें की जा रही हैं। वहीं, मुहर्रम की 9वीं और 10वीं तारीख को ताजिया रखकर फातिहा, नौहाख्वानी और मातमख्वानी की जाएगी। इसके बाद ताजियों को पारंपरिक मार्ग से गश्त कराते हुए कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। आयोजन समिति के अनुसार, आगामी 6 मुहर्रम (22 जून 2026) को कर्बला की दास्तान के विशेष बयान के लिए मौलाना आमिर मियां सफवी मिस्बाही सुल्तानपुर घोष पहुंचेंगे। वह कर्बला की शहादत और हज़रत इमाम हुसैन की कुर्बानी तथा उसके बाद के वाक़्या पर खिताब करेंगे। यह कार्यक्रम इमामबाड़ा पर बाद नमाज़ ईशा शुरू होगा। आयोजक शीबू खान (पत्रकार) एवं अंजुमन सुल्तानपुर घोष कमेटी ने क्षेत्र के लोगों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर शहादतनामा सुनने की अपील की है। इस अवसर पर जैनुल आब्दीन (मुन्ना मीर), मोहम्मद जफर (नेताजी), आफताब आलम (चांद), जुनेद हक़, मोहम्मद जुबैर, सरफराज, अरमान, तंजील, जसीम (तन्नू), मुजनबीन, अशफाक, रानू, आलम, कादिर, जीशान, दानिश, मुस्तकीम, मोहम्मद कैफ, सुहैल, रियाज, आरिफ, इलियास, अदनान, रेहान और फैज सहित अंजुमन कमेटी के कई सदस्य उपस्थित रहे।

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