नई दिल्ली/ओडेसा। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच एक बार फिर भारतीय नागरिकों के हताहत होने की दुखद खबर सामने आई है। यूक्रेन के रणनीतिक महत्व वाले ओडेसा बंदरगाह पर 19 जुलाई की शाम हुए भीषण हमले में एक व्यापारिक जहाज पर सवार चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य भारतीय गंभीर रूप से घायल हो गया। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने सोमवार 20 जुलाई को इस घटना की आधिकारिक पुष्टि करते हुए गहरा शोक व्यक्त किया है। घटना के बाद भारत सरकार ने यूक्रेन में मौजूद भारतीय दूतावास को तत्काल राहत और समन्वय के निर्देश दिए हैं, जबकि मृतकों के परिजनों तक सूचना पहुंचाने और उनके पार्थिव शरीर को स्वदेश लाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह हमला 19 जुलाई की शाम ओडेसा बंदरगाह क्षेत्र में हुआ, जहां एक व्यापारिक जहाज पर मिसाइल या ड्रोन हमला हुआ। हमले के समय जहाज पर विभिन्न देशों के चालक दल के सदस्य मौजूद थे, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल थे। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि जहाज को भारी नुकसान पहुंचा और कई लोग उसकी चपेट में आ गए। चार भारतीय नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल भारतीय को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत सरकार इस घटना से बेहद दुखी है और प्रभावित परिवारों के साथ पूरी संवेदना व्यक्त करती है। भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन, अस्पतालों और जहाज संचालक कंपनी के साथ लगातार संपर्क में है ताकि घायलों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा सके तथा मृतकों के पार्थिव शरीर को शीघ्र भारत भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
सूत्रों के अनुसार, जिस जहाज पर हमला हुआ वह अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गतिविधियों में शामिल था और ओडेसा बंदरगाह पर आवश्यक माल की ढुलाई के लिए पहुंचा था। युद्ध के कारण यह क्षेत्र पहले से ही अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है और यहां समय-समय पर मिसाइल एवं ड्रोन हमलों की घटनाएं होती रही हैं। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को जारी रखने के लिए कई जहाज सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संचालन कर रहे हैं।
ओडेसा यूक्रेन का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री बंदरगाह माना जाता है। काला सागर के तट पर स्थित यह बंदरगाह अनाज, खाद्य सामग्री, औद्योगिक उत्पाद और अन्य व्यापारिक वस्तुओं के निर्यात का प्रमुख केंद्र है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के दौरान यह बंदरगाह कई बार हमलों का निशाना बन चुका है। हाल के महीनों में यहां सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सख्त की गई थी, लेकिन इसके बावजूद सैन्य कार्रवाई का खतरा लगातार बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के कारण समुद्री मार्गों पर कार्यरत नागरिक जहाजों के लिए जोखिम लगातार बढ़ता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त उपाय कर रही हैं, लेकिन संघर्ष क्षेत्र में पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद कठिन हो गया है। भारतीय नाविक भी बड़ी संख्या में दुनिया भर के व्यापारिक जहाजों पर कार्यरत हैं और कई बार उन्हें युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से होकर गुजरना पड़ता है।
घटना की जानकारी मिलते ही भारत सरकार ने यूक्रेन में भारतीय मिशन और संबंधित अधिकारियों को सक्रिय कर दिया। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि घायलों के उपचार, मृतकों की पहचान और उनके परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही स्थानीय प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है ताकि घटना के सभी पहलुओं की जानकारी प्राप्त की जा सके।
इस हादसे के बाद भारत ने एक बार फिर अपने नागरिकों से युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में अत्यधिक सावधानी बरतने की अपील की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जो भारतीय नागरिक अभी भी यूक्रेन या संघर्ष प्रभावित इलाकों में मौजूद हैं, वे भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें और स्थानीय प्रशासन तथा सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें। किसी भी आपात स्थिति में भारतीय मिशन द्वारा जारी हेल्पलाइन और आपातकालीन संपर्क सेवाओं का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को ढाई वर्ष से अधिक समय हो चुका है। इस दौरान हजारों नागरिकों की जान जा चुकी है और अनेक शहरों का बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। विशेष रूप से बंदरगाह, ऊर्जा प्रतिष्ठान, रेलवे नेटवर्क और औद्योगिक क्षेत्रों पर लगातार हमले होते रहे हैं। ओडेसा भी उन प्रमुख शहरों में शामिल है, जहां कई बार बड़े हमले दर्ज किए जा चुके हैं।
समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि काला सागर क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पहले की तुलना में अधिक जोखिमपूर्ण हो गई है। बीमा लागत बढ़ने के साथ-साथ जहाजों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी अतिरिक्त खर्च किया जा रहा है। इसके बावजूद युद्ध क्षेत्र में किसी भी समय हमले का खतरा बना रहता है।
चार भारतीय नागरिकों की मौत की खबर से देशभर में शोक की लहर है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने मृतकों के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए उनके परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है। साथ ही घायल भारतीय के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की जा रही है।
भारत सरकार ने दोहराया है कि विदेशों में रहने वाले प्रत्येक भारतीय नागरिक की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जैसे-जैसे स्थानीय प्रशासन से अधिक जानकारी प्राप्त होगी, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ओडेसा बंदरगाह पर हुआ यह हमला एक बार फिर यह दर्शाता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विभिन्न देशों के नागरिक भी प्रभावित हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री परिवहन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में विश्व समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि संघर्ष कब समाप्त होगा और नागरिकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे।
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