हुसैनगंज, फतेहपुर। अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक रावण वध का दृश्य हुसैनगंज कस्बे में जीवंत हो उठा। जैसे ही प्रभु श्रीराम ने एक साथ 31 शक्तिशाली बाण चलाकर रावण का अंत किया, पूरा रामलीला मैदान जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
226 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक श्री स्वामी चंदादास रामलीला कमेटी की रामलीला के आठवें दिन करवा चौथ की रात रावण वध की लीला का प्रसिद्ध कलाकारों ने शानदार मंचन किया।
श्रीरामचरितमानस की वंदना और प्रभु श्रीराम की आराधना के साथ लीला का शुभारंभ हुआ। मंचन के दौरान रावण के छोटे भाई विभीषण ने अपने बड़े भाई को माता सीता को सम्मानपूर्वक वापस करने और प्रभु श्रीराम की शरण में जाने की सलाह दी। इससे क्रोधित होकर रावण ने विभीषण को लंका से निष्कासित कर दिया।
इसके बाद विभीषण रामादल में पहुंचे, जहां प्रभु श्रीराम ने समुद्र के जल से उनका राजतिलक किया। इसके बाद समुद्र पार करने के लिए प्रभु श्रीराम ने तीन दिनों तक समुद्र की आराधना की, लेकिन मार्ग न मिलने पर उन्होंने धनुष पर बाण चढ़ाया। भयभीत होकर समुद्र देव प्रकट हुए और नल-नील के माध्यम से समुद्र पर सेतु निर्माण का उपाय बताया।
लीला के अगले प्रसंग में युवराज अंगद को अंतिम प्रयास के रूप में रावण के दरबार में समझौते का संदेश लेकर भेजा गया। अंगद ने रावण को माता सीता को वापस करने की सलाह दी, लेकिन रावण अपने अहंकार पर अड़ा रहा।
अंततः अपने सभी प्रमुख योद्धाओं और परिजनों को खोने के बाद रावण स्वयं युद्धभूमि में उतरा। प्रभु श्रीराम और रावण के बीच भीषण युद्ध हुआ। इसी दौरान विभीषण ने रावण की नाभि में अमृत होने का रहस्य बताया। इसके बाद प्रभु श्रीराम ने एक साथ 31 बाण चलाए, जिनके प्रहार से रावण धराशायी हो गया।
रावण वध होते ही पूरा मैदान जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। प्रभु श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण रावण के पास नीति और ज्ञान की शिक्षा लेने पहुंचे। इसी के साथ रामलीला का समापन हुआ।
इस अवसर पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह, उपाध्यक्ष उदयभान सिंह सहित कमेटी के पदाधिकारी मौजूद रहे। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए थरियांव थाना प्रभारी शमशेर बहादुर सिंह, चौकी इंचार्ज अमरीश मिश्रा, प्रवीण चौधरी, अजीत कुमार सहित पुलिसकर्मी तैनात रहे।
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