नई दिल्ली। जलवायु कार्यकर्ता और लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल सोनम वांगचुक ने अपने अनिश्चितकालीन अनशन के 26वें दिन भी संघर्ष जारी रखते हुए समर्थकों से शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के उकसावे या तनावपूर्ण स्थिति में हिंसा का सहारा लेने के बजाय लोग “फूलों” के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराएं। उनका कहना है कि अहिंसा और संयम ही लोकतांत्रिक आंदोलनों की सबसे बड़ी ताकत है और इसी रास्ते पर चलते हुए उनकी लड़ाई आगे बढ़ेगी।
दिल्ली के जंतर-मंतर स्थित आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में समर्थक, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि लगातार पहुंच रहे हैं। 26 दिनों से जारी अनशन के बावजूद वांगचुक ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति, सरकार या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि यदि आंदोलन के दौरान कोई उकसावे की स्थिति पैदा होती है तो उसका जवाब मुस्कुराकर और हाथों में फूल लेकर दिया जाए।
सोनम वांगचुक ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपरा अहिंसा और सत्याग्रह पर आधारित रही है। महात्मा गांधी ने देश को आजादी दिलाने के लिए जिस मार्ग का अनुसरण किया, वही रास्ता आज भी सबसे प्रभावी है। उन्होंने कहा कि यदि आंदोलनकारी हिंसा का सहारा लेते हैं तो आंदोलन का मूल उद्देश्य कमजोर पड़ जाता है, जबकि शांति और संयम सरकार तथा समाज दोनों के सामने मजबूत संदेश प्रस्तुत करते हैं।
उन्होंने अपने समर्थकों से अपील करते हुए कहा कि यदि कोई पुलिसकर्मी, प्रशासनिक अधिकारी या कोई अन्य व्यक्ति आंदोलनकारियों को उकसाने का प्रयास करे तो उसका स्वागत फूल देकर किया जाए। उन्होंने कहा कि विरोध का सबसे सुंदर तरीका वही है जिसमें किसी को नुकसान न पहुंचे और संदेश भी प्रभावी ढंग से समाज तक पहुंचे। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है, जहां बड़ी संख्या में लोग उनकी अपील का समर्थन कर रहे हैं।
उधर आंदोलन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में और अधिक कड़ी कर दी गई है। दिल्ली पुलिस लगातार पूरे क्षेत्र की निगरानी कर रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। बैरिकेडिंग बढ़ा दी गई है और अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है। हालांकि आंदोलनकारी शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे हुए हैं और पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं।
सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर भी लगातार चिंता व्यक्त की जा रही है। 26 दिनों से जारी अनशन के कारण उनका वजन कम होने और शारीरिक कमजोरी बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। चिकित्सकों की एक टीम समय-समय पर उनके स्वास्थ्य की जांच कर रही है और आवश्यक चिकित्सकीय सलाह दे रही है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक अनशन जारी रहने से शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं, इसलिए स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है।
हालांकि वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के लिए नहीं बल्कि हिमालयी क्षेत्रों, पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की पीढ़ियों के हितों की रक्षा के लिए है। उनका मानना है कि जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव पर्वतीय क्षेत्रों पर पड़ रहा है और यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
आंदोलन को देश के विभिन्न हिस्सों से भी समर्थन मिल रहा है। कई सामाजिक संगठनों, पर्यावरण विशेषज्ञों, शिक्षकों, छात्रों और बुद्धिजीवियों ने सोनम वांगचुक के आंदोलन के प्रति एकजुटता व्यक्त की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी उनके समर्थन में अभियान चलाए जा रहे हैं और लोग शांतिपूर्ण आंदोलन को लोकतंत्र की ताकत बता रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा केवल लद्दाख तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश और दुनिया के भविष्य से जुड़ा हुआ विषय है।
राजनीतिक स्तर पर भी इस आंदोलन को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। विपक्षी दल सरकार से वांगचुक की मांगों पर संवाद स्थापित करने और समाधान निकालने की अपील कर रहे हैं। वहीं सरकार की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, हालांकि प्रशासनिक स्तर पर स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियरों के पिघलने, जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन जैसे मुद्दे अब केवल वैज्ञानिक बहस का विषय नहीं रह गए हैं, बल्कि सीधे आम लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में इन विषयों पर गंभीर नीति निर्माण और व्यापक जनभागीदारी की आवश्यकता है। उनका मानना है कि यदि पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता नहीं दी गई तो आने वाले समय में प्राकृतिक संसाधनों पर संकट और गहरा सकता है।
सोनम वांगचुक ने अपने संदेश के अंत में कहा कि संघर्ष लंबा हो सकता है, लेकिन धैर्य और अहिंसा से ही स्थायी समाधान निकलते हैं। उन्होंने सभी समर्थकों से संयम बनाए रखने, किसी भी प्रकार की अफवाह से बचने और आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील की। उन्होंने दोहराया कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं बल्कि संवाद के माध्यम से समाधान निकालना है।
फिलहाल जंतर-मंतर पर आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से जारी है। देशभर की निगाहें इस आंदोलन पर टिकी हुई हैं और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कोई सकारात्मक संवाद स्थापित हो पाता है या नहीं। वहीं सोनम वांगचुक की “फूलों से जवाब” देने की अपील ने उनके आंदोलन को एक नई पहचान दी है और इसे अहिंसक लोकतांत्रिक विरोध का प्रतीक माना जा रहा है।
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