खागा, फतेहपुर। बुंदेलखंड राज्य की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के केंद्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय बुंदेलखंडी के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाने का दावा किया गया है। समिति का कहना है कि आजादी के दशकों बाद भी प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न बुंदेलखंड विकास और बुनियादी सुविधाओं के मामले में पिछड़ा हुआ है।
प्रवीण पांडेय ने कहा कि करीब दो करोड़ आबादी और 70,592 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला बुंदेलखंड अलग राज्य बनने की क्षमता रखता है। इसके बावजूद क्षेत्र को रोजगार, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन जैसी सुविधाओं के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को पर्याप्त बजट नहीं मिल रहा है, जबकि क्षेत्र में आज तक एम्स जैसा अस्पताल और बेहतर हवाई संपर्क जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विकास सिर्फ महानगरों का हक है?
बुंदेलखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग आज भी रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर आय के अवसरों के लिए जूझ रहे हैं। समिति का मानना है कि अलग राज्य बनने से क्षेत्र के संसाधनों का बेहतर उपयोग और स्थानीय स्तर पर विकास की गति तेज हो सकती है।
प्रवीण पांडेय ने कहा कि बुंदेलखंड का वास्तविक विकास अलग राज्य बनने से ही संभव है। उन्होंने लोगों से आंदोलन को मजबूत करने और गांव-गांव से आवाज बुलंद करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड को उसका हक दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
News Wani
