नई दिल्ली। फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट में 4 अगस्त को उस समय गंभीर स्थिति बन गई, जब विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम कुछ सेकेंड के लिए एक साथ काम करना बंद कर गए। शुरुआती जांच के मुताबिक, इस दौरान विमान करीब 300 फीट नीचे आ गया और लगभग 4 सेकेंड तक पायलटों के कंट्रोल का असर बेहद सीमित रहा।
हाइड्रोलिक सिस्टम विमान के महत्वपूर्ण कंट्रोल हिस्सों को संचालित करने में मदद करता है। इसके फेल होने के कारण एलिवेटर, एलेरॉन और स्पॉइलर जैसे कंट्रोल सरफेस ने पायलट के इनपुट पर अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं दी। इसी दौरान ऑटोपायलट भी डिस्कनेक्ट हो गया और कॉकपिट में स्टॉल की चेतावनी सुनाई दी।
स्थिति बिगड़ने पर को-पायलट ने विमान की नोज नीचे करने के लिए कंट्रोल स्टिक आगे किया, लेकिन हाइड्रोलिक पावर उपलब्ध नहीं होने के कारण तत्काल अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। कुछ सेकेंड बाद हाइड्रोलिक सिस्टम दोबारा सक्रिय हुए और विमान तेजी से रिकवर करने लगा। इसके बाद पायलटों ने विमान को संभाल लिया और दिल्ली में सुरक्षित लैंडिंग कराई।
24 यात्री और क्रू सदस्य घायल
विमान के अचानक नीचे आने और जोरदार झटकों के कारण कई यात्रियों और केबिन क्रू को चोटें आईं। कुछ लोग विमान की छत से जा टकराए। हादसे के बाद विमान के अंदर भी नुकसान की जानकारी सामने आई थी और घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
जांच में तकनीकी खराबी की आशंका
इस घटना की जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) कर रहा है। विमान निर्माता एयरबस भी तकनीकी जांच में सहयोग कर रहा है। शुरुआती जानकारी में हाइड्रोलिक सिस्टम से जुड़े प्रेशर सेंसर में खराबी की आशंका जताई गई है, हालांकि हादसे की अंतिम वजह अभी तय नहीं हुई है।
जांच में फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर के डेटा के साथ-साथ विमान के मेंटेनेंस रिकॉर्ड, मौसम की स्थिति और पायलटों की कार्रवाई का भी अध्ययन किया जा रहा है।
कैसे काम करता है हाइड्रोलिक सिस्टम?
विमान के कंट्रोल को संचालित करने के लिए हाइड्रोलिक सिस्टम बेहद महत्वपूर्ण होता है। पायलट जब विमान को ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं मोड़ने के लिए कंट्रोल इनपुट देता है, तो हाइड्रोलिक सिस्टम उस कमांड को पर्याप्त ताकत में बदलकर विमान के कंट्रोल सरफेस तक पहुंचाता है।
यदि हाइड्रोलिक सिस्टम में गंभीर खराबी आ जाए, तो विमान के एलिवेटर और एलेरॉन जैसे हिस्सों को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि इस घटना में कुछ सेकेंड की खराबी भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ब्लैक बॉक्स से सामने आए अहम संकेत
ब्लैक बॉक्स में विमान की उड़ान से जुड़ा महत्वपूर्ण डेटा रिकॉर्ड होता है। इसमें फ्लाइट के तकनीकी पैरामीटर और कॉकपिट में हुई बातचीत से जुड़ी जानकारी शामिल होती है। जांच एजेंसियां इसी डेटा के आधार पर यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि घटना के दौरान विमान के सिस्टम और पायलटों की कार्रवाई किस क्रम में हुई।
AAIB ने जांच पूरी होने से पहले किसी एक कारण को अंतिम वजह मानने से बचने की बात कही है। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम एक साथ क्यों फेल हुए और विमान के अचानक नीचे आने की पूरी तकनीकी वजह क्या थी।
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