नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह फैसला NEET पेपर लीक मामले को लेकर पिछले 36 दिनों से जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और बढ़ते जनदबाव के बीच आया। इस्तीफे के बाद आंदोलनकारियों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार के बारे में कहा जाता था कि यहां इस्तीफे नहीं होते, लेकिन लोकतांत्रिक संघर्ष ने यह साबित कर दिया कि जनता की आवाज असर डाल सकती है। उन्होंने कहा कि उनकी दो प्रमुख मांगें अभी भी बाकी हैं—मृत छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कदम उठाया जाए। साथ ही छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने की मांग भी दोहराई गई।
इस्तीफे के बाद जारी अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने युवाओं को भ्रमित किए जाने का उल्लेख किया और अपने कार्यकाल की विभिन्न उपलब्धियों का भी जिक्र किया।
इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी अपने संदेश में कहा कि यह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक संघर्ष की सफलता है।
इस्तीफे से कुछ घंटे पहले एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा था कि नई पीढ़ी के साथ संवाद आवश्यक है और केवल आदेश देकर समाज नहीं चलाया जा सकता। इसके कुछ घंटों बाद शिक्षा मंत्री का इस्तीफा सामने आया।
इससे पहले NEET पेपर लीक मामले में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त किया गया था और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की घोषणा की गई थी। शिक्षा मंत्रालय में भी हाल ही में प्रशासनिक स्तर पर बदलाव किए गए थे।
वर्ष 2024 में लागू सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम के तहत पेपर लीक, नकल, परीक्षा में धांधली और संबंधित अपराधों को गैर-जमानती बनाया गया है। कानून में दोषियों के लिए तीन से दस वर्ष तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
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