लखनऊ। गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण राजधानी लखनऊ के फैजुल्लागंज और आसपास के इलाकों में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। लगातार छठवें दिन कई मोहल्लों में पानी भरा हुआ है। स्थानीय लोगों के मुताबिक 40 हजार से अधिक घर बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं और रोजाना बड़ी संख्या में परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं।
मिल्लतनगर, जैनब मस्जिद क्षेत्र, राम विहार कॉलोनी, मामा कॉलोनी, दाऊदनगर, चौबे की डेयरी और लोहरामऊ समेत कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। कुछ गलियों में घुटनों तक पानी है, जबकि निचले इलाकों के घरों में कंधे तक पानी पहुंचने की बात सामने आई है।
नाव से बाहर निकलने के लिए भी पैसे मांगने का आरोप
बाढ़ प्रभावित लोगों ने राहत व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सरकारी स्तर पर उपलब्ध कराई गई नावों से बाहर निकलने के लिए कुछ नाविक प्रति व्यक्ति करीब 50 रुपये मांग रहे हैं। कई लोगों ने आरोप लगाया कि जरूरत के समय नाव उपलब्ध नहीं हो रही है और घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
वहीं, एक नाविक ने दावा किया कि उसे कुछ दिन पहले ही बाढ़ प्रभावित इलाके में काम के लिए लगाया गया था। शुरुआत में उसे 1 हजार रुपये दिए गए थे और प्रतिदिन 3 हजार रुपये देने की बात कही गई थी, लेकिन इसके बाद भुगतान नहीं किया गया।
दो घंटे इंतजार के बाद भी नहीं पहुंची नाव
पवन विहार कॉलोनी के एक निवासी ने बताया कि घरों में पानी भरने के साथ सांप-बिच्छू घुसने का खतरा बना हुआ है। लोगों को बाहर निकलने के लिए नाव का इंतजार करना पड़ रहा है, लेकिन कई बार दो-दो घंटे इंतजार करने के बाद भी नाव नहीं पहुंचती।
कुछ लोगों का कहना है कि वे अपने घरों को छोड़कर किराये के कमरों या सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हैं। कई परिवार ट्रैक्टर-ट्रॉली की मदद से घरेलू सामान, स्कूटी और पालतू जानवरों को सुरक्षित जगह ले जा रहे हैं।
बच्चों और बुजुर्गों को निकालना सबसे बड़ी चुनौती
बाढ़ के पानी के बीच परिवार अपने छोटे बच्चों और बुजुर्गों को लेकर घरों से बाहर निकल रहे हैं। कई जगह लोग बच्चों को कंधे पर बैठाकर पानी से गुजरते दिखाई दे रहे हैं। कुछ परिवार नाव के जरिए इलाका छोड़ रहे हैं।
बाढ़ के कारण गलियों में रहने वाले आवारा कुत्तों के लिए भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई कुत्ते पानी से बचने के लिए घरों की छतों पर चढ़े हुए दिखाई दे रहे हैं।
पीने के पानी और भोजन की समस्या
बाढ़ प्रभावित इलाकों में सबसे बड़ी समस्या पीने के साफ पानी और भोजन की बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी लगातार बढ़ रहा है और रोजमर्रा की जरूरतों का सामान जुटाना मुश्किल हो गया है।
कुछ इलाकों में लोगों ने राहत व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें समय पर भोजन, पानी और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था नहीं मिल पा रही है।
तीन रैन बसेरों की व्यवस्था
मामा कॉलोनी में प्रभावित लोगों के लिए तीन रैन बसेरे बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, बड़ी संख्या में परिवारों के प्रभावित होने के कारण राहत और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था को लेकर लोगों की चिंताएं बनी हुई हैं।
बाढ़ के कारण कई परिवार अपना घर, सामान और रोजमर्रा का जीवन छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन नावों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ पीने के पानी, भोजन और राहत सामग्री की पर्याप्त व्यवस्था करे।
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