लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लखनऊ में आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला में सामाजिक एकता और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को जाति, क्षेत्र और अन्य आधारों पर बांटने वाली ताकतों से सतर्क रहने की जरूरत है। शिक्षक समाज की चेतना और नई पीढ़ी के मार्गदर्शक होते हैं, इसलिए उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को बिखरा हुआ नहीं, बल्कि एक भारत, श्रेष्ठ भारत के रूप में आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि समाज में विभाजन पैदा करने वाली सोच देश की एकता के लिए चुनौती है। शिक्षकों को युवाओं में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक समरसता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए काम करना चाहिए।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य सामने है। इसके लिए देशवासियों को गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलकर अपनी विरासत पर गर्व करना होगा। उन्होंने नागरिकों से अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी प्राथमिकता देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना होगा। युवा पीढ़ी को सही दिशा देने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
शिक्षक हैं समाज के युग निर्माता
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को शिक्षा देने का काम नहीं करते, बल्कि वे समाज की चेतना को दिशा देते हैं। जब शिक्षक अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करता है तो देश को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।
उन्होंने भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए तक्षशिला, नालंदा और गुरुकुल व्यवस्था को भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी परंपरा से देश को अनेक महान ऋषि, आचार्य और राष्ट्रनिर्माता मिले।
जाति और क्षेत्र के नाम पर बांटने से बचने की अपील
मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास में ऐसे दौर भी रहे हैं, जब समाज को कमजोर करने के लिए लोगों को अलग-अलग वर्गों में बांटने की कोशिश हुई। आज भी जाति और क्षेत्र के नाम पर समाज में दूरी पैदा करने की कोशिशें दिखाई देती हैं। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे ऐसी विभाजनकारी सोच का मुकाबला सामाजिक एकता और जागरूकता के माध्यम से करें।
प्रकृति संरक्षण पर भी दिया जोर
मुख्यमंत्री ने नदियों के संरक्षण को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नदियां जीवन के लिए उसी तरह जरूरी हैं जैसे शरीर के लिए धमनियां। नदियों को प्रदूषण से बचाना और उनकी अविरलता बनाए रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि प्रकृति सभी के साथ समान व्यवहार करती है। सूर्य, पेड़ और नदियां किसी के साथ भेदभाव नहीं करते। इसलिए मनुष्य को भी प्रकृति से प्राप्त संसाधनों के संरक्षण के लिए जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
युवा पीढ़ी को सही दिशा देने पर जोर
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने युवाओं के मार्गदर्शन की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि आयोजित प्रतियोगिता से 11 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि युवा ही देश का भविष्य हैं और उन्हें सही दिशा देने के लिए शिक्षकों, परिवारों और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर कार्य करने वाले 10 विद्यालयों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर गायत्री परिवार के पदाधिकारी, शिक्षक, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में प्रतिभागी मौजूद रहे।
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