संवाददाता
सैयद समीर हुसैन
————————– ठाणे, 12 अगस्त: गोटेघर वन विभाग क्षेत्र में एक गरीब परिवार की झोपड़ी पर की गई तोड़क कार्रवाई को लेकर वन विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया जा रहा है कि वन विभाग ने अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई में गरीब और प्रभावशाली लोगों के बीच कथित तौर पर भेदभाव किया है। जानकारी के अनुसार, 12 अगस्त को दोपहर करीब 12 से 1 बजे के बीच वन विभाग के अधिकारी प्रवीण आव्हाड के नेतृत्व में शील-डायघर क्षेत्र के वन गार्ड अधिकारी कृष्णा पोले और उनकी टीम ने भंगार का व्यवसाय करने वाले एक गरीब परिवार की झोपड़ी पर कार्रवाई की। बताया गया कि यह परिवार गोटेघर वन विभाग कार्यालय के पास कुछ मीटर की दूरी पर वन विभाग की सीमा से सटे स्थान पर झोपड़ी बनाकर रह रहा था। कार्रवाई के संबंध में अधिकारी प्रवीण आव्हाड की ओर से कथित तौर पर बताया गया कि संबंधित व्यक्ति वन विभाग की सीमा से सटकर अतिक्रमण कर रहा था। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं कि यदि वन भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, तो वन विभाग की सीमा के आसपास मौजूद अन्य कथित अतिक्रमणों पर भी समान कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? स्थानीय आरोपों के मुताबिक, वन विभाग की बाउंड्री वॉल और जाली को नुकसान पहुंचाकर वन भूमि के भीतर कथित रूप से ट्रकों की पार्किंग की जा रही है। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि ट्रक चालकों से प्रतिदिन करीब 150 रुपये की राशि वसूली जाती है। हालांकि, इस राशि की वसूली कौन करता है और इसका पैसा कहां जाता है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। लेकिन ये बात सत्य है के वसूली की जा रही है,सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ट्रक पार्किंग मैदान में मौजूद एक टायर पंचर वाले ने खुद कबूला था के पार्किंग का ₹,150 वही वसूलता है। इसी तरह, कुछ स्थानीय सूत्रों ने वन विभाग के अधिकारियों पर कथित रूप से पैसे लेकर अतिक्रमणकारियों को संरक्षण देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है। पर जब ऐसे विषय पर पत्रकार अधिकारियों से सवाल करना चाहते है तो ये वन अधिकारी जवाब देने से इनकार करते है और कहते है हमें मीडिया में जवाब देने का अधिकार नहीं है,ऐसे में जनता समझ सकती है के सचाई क्या है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता मुख्तार शोहराब अंसारी द्वारा मामले से संबंधित दस्तावेज सामने लाने और उच्च स्तर पर जांच की मांग किए जाने की बात कही जा रही है। उनके अनुसार, गोटेघर वन विभाग के अंतर्गत आने वाले कलवा, मुंब्रा, शील-डायघर, पिंपरी और रबाले सहित विभिन्न क्षेत्रों में वन भूमि से जुड़े मामलों की जांच की जा रही है। यदि जांच में वन भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे या आर्थिक अनियमितताओं के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग तेज़ हो सकती है। मामले को मुंबई उच्च न्यायालय के समक्ष ले जाने की भी बात सामने आ रही है।आपको बतादे के वन विभाग में हज़ारों करोड़ रुपए के घोटाले वन भूमि बेचने के आरोप लगाए जा रहे है,और ये सिलसिला कई वर्षों से चल रहे है,बहुत जल्द मुख्तार शोहराब अंसारी के द्वारा आरटीआई के माध्यम से मिले जवाबो और पास में मौजूद सबूतों के आधार पर सच जनता के सामने आएगा,बताया जा रहा है वन विभाग से जुड़े भूमि 7/12 उतारे दस्तावेज़ को लेकर तहसीलदार कार्यालय पर भी सवाल उठ रहे है,जल्द ही इसकी भी पुष्ठि की जाएगी,वन भूमि पर अवैध भट्टियों को चलने की परमिशन किस वन विभाग के अधिकारी के द्वारा दी गई है, इसकी भी जांच जारी है जल्द हि प्रदूषण विभाग के द्वारा कारवाही की जाएगी,और किस अधिकारियों की सांठ गांठ से अवैध भट्टियों का कारोबार चलाया जा रहा है उसका भी खुलासा होगा,दोषी पाए जाने पर कारवाही की जाएगी,फिलहाल वन अधिकारीयो में पूरे मामले को लेकर हलचल चल रही है,फिलहाल पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का पक्ष और संबंधित दस्तावेज़ सामने आने के बाद ही इन आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी। न्यूज़ बनाए हिंदी में
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