‘बुजुर्गों के आस्ताने से कोई खाली नहीं लौटता’: मौलाना सलीम रजा
महोबा। हजरत कुद्दूस पीर साहब रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स अकीदत और उत्साह के साथ मनाया गया। उर्स में शिरकत करने के लिए मजार-ए-अकदस पर बड़ी संख्या में अकीदतमंद पहुंचे। चादरपोशी, कुरानख्वानी, तकरीर, नातिया कलाम और लंगर के आयोजन के साथ उर्स संपन्न हुआ।
बुधवार की रात करीब नौ बजे चादर का जुलूस निकाला गया, जो रात करीब दस बजे मजार-ए-अकदस पहुंचा। यहां अकीदतमंदों ने पूरी अकीदत के साथ चादर चढ़ाई। फातिहा के बाद मुल्क में अमन-चैन, खुशहाली और आपसी भाईचारे के लिए दुआ की गई। लोगों ने अपनी जायज मुरादों के लिए भी दुआ मांगी।
रात करीब दस बजे मजार-ए-अकदस परिसर में तकरीर का आयोजन हुआ। मौलाना सलीम रजा ने खिताब करते हुए कहा कि “बुजुर्गों के आस्ताने से कोई भी खाली नहीं लौटता। आज भी लोग बुजुर्गों के आस्तानों से फैज हासिल करते हैं।”
उन्होंने दीनी तालीम पर जोर देते हुए कहा कि समाज को शिक्षा और दीन की सही जानकारी से जुड़ना चाहिए। इंसान को अल्लाह और उसके रसूल के बताए रास्ते पर चलते हुए नेक जिंदगी गुजारनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अल्लाह पर पूरा यकीन रखने और अच्छे कार्य करने की अपील की।
तकरीर के बाद नातिया कलाम का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर रात तक चलता रहा। हाफिज सुब्हान, हाफिज असगर, हयात खां और उवैश खां समेत अन्य लोगों ने नातिया कलाम पेश किए, जिन्हें सुनकर मौजूद अकीदतमंद झूम उठे।
गुरुवार सुबह मजार-ए-अकदस पर कुरानख्वानी का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। कुरानख्वानी के समापन पर दुआ हुई और अकीदतमंदों के बीच तबर्रुक वितरित किया गया।
दोपहर करीब दो बजे मजार परिसर में महिला और पुरुष अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी। उर्स के मौके पर विभिन्न लोगों की ओर से देगें तैयार कराई गईं और मजार पर पहुंचे लोगों को तबर्रुक बांटा गया। आस्ताना परिसर में बिरयानी, दालचा और जर्दा आदि का लंगर भी वितरित किया गया।
हजरत कुद्दूस पीर साहब का मजार पहाड़ की ऊंचाई पर स्थित होने के बावजूद अकीदतमंदों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। बड़ी संख्या में लोग पहाड़ पर चढ़कर मजार तक पहुंचे, जहां उन्होंने फातिहा पढ़ी, दुआ मांगी और लंगर में हिस्सा लिया। सुबह से देर शाम तक मजार पर अकीदतमंदों के आने-जाने का सिलसिला जारी रहा।
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