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बिहार में पंचायत परिसीमन की प्रक्रिया शुरू: नए ग्राम पंचायतों के निर्धारण का अधिकार जिलाधिकारियों को, सरकार ने जारी की अधिसूचना

पटना। बिहार सरकार ने राज्य में पंचायत व्यवस्था को अधिक प्रभावी, संतुलित और जनसंख्या के अनुरूप बनाने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार ने नए ग्राम पंचायतों के निर्धारण एवं परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया शुरू करते हुए सभी जिलाधिकारियों (डीएम) को इस संबंध में अधिकार प्रदान कर दिए हैं। पंचायती राज विभाग ने सोमवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी, जिसके बाद राज्यभर में पंचायतों के पुनर्गठन और सीमाओं के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।

पंचायती राज विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अब संबंधित जिलों के जिलाधिकारी स्थानीय परिस्थितियों, जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति, प्रशासनिक सुविधा तथा पंचायतों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नए ग्राम पंचायतों के गठन, पुराने पंचायत क्षेत्रों के पुनर्गठन तथा परिसीमन की कार्रवाई कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य तेजी से बढ़ती आबादी, बदलते ग्रामीण स्वरूप और प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप पंचायत व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में कई गांवों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जबकि अनेक पंचायतों का भौगोलिक विस्तार इतना अधिक हो गया है कि विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासनिक निगरानी चुनौतीपूर्ण हो गई है। इसी कारण लंबे समय से पंचायतों के पुनर्गठन और परिसीमन की मांग उठ रही थी। अब सरकार के इस फैसले से उन क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है, जहां नई पंचायतों के गठन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

अधिसूचना लागू होने के बाद जिलाधिकारी अपने-अपने जिलों में विस्तृत सर्वेक्षण कराएंगे। इस दौरान पंचायतों की वर्तमान जनसंख्या, गांवों की संख्या, भौगोलिक दूरी, संपर्क मार्ग, प्राकृतिक सीमाएं, सामाजिक एवं प्रशासनिक परिस्थितियों सहित अन्य आवश्यक पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। इन तथ्यों के आधार पर नए ग्राम पंचायतों के गठन या मौजूदा पंचायतों के परिसीमन का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि परिसीमन की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी। प्रस्ताव तैयार होने के बाद आवश्यकतानुसार आपत्तियां और सुझाव भी आमंत्रित किए जा सकते हैं, ताकि स्थानीय लोगों की राय को भी प्रक्रिया में शामिल किया जा सके। अंतिम निर्णय सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही लागू किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायतों का सही परिसीमन ग्रामीण प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि किसी पंचायत की आबादी अत्यधिक बढ़ जाती है या उसका क्षेत्र बहुत बड़ा हो जाता है तो विकास योजनाओं की निगरानी, पंचायत प्रतिनिधियों की जवाबदेही और सरकारी सेवाओं की पहुंच प्रभावित होती है। ऐसे में समय-समय पर परिसीमन आवश्यक माना जाता है।

इस फैसले का प्रभाव आगामी पंचायत चुनावों पर भी पड़ सकता है। नए ग्राम पंचायतों के गठन अथवा सीमाओं में बदलाव होने की स्थिति में पंचायतों की संख्या, वार्डों का स्वरूप और विभिन्न निर्वाचित पदों का पुनर्निर्धारण भी किया जा सकता है। हालांकि सरकार ने अभी केवल परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने संबंधी अधिसूचना जारी की है और चुनाव संबंधी कोई अलग घोषणा नहीं की गई है।

ग्रामीण विकास से जुड़े जानकारों का कहना है कि नई पंचायतों के गठन से स्थानीय प्रशासन लोगों के और करीब पहुंचेगा। छोटी और संतुलित पंचायतों में विकास योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से किया जा सकता है, वहीं ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान भी अपेक्षाकृत तेजी से संभव होगा। इससे पंचायत स्तर पर शासन व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

राज्य सरकार का मानना है कि पंचायतें लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं और ग्रामीण विकास की अधिकांश योजनाएं इन्हीं के माध्यम से संचालित होती हैं। इसलिए पंचायतों का गठन वास्तविक जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप होना आवश्यक है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारियों को यह अधिकार सौंपा गया है।

पंचायती राज विभाग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि परिसीमन की प्रक्रिया के दौरान सभी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए तथा किसी भी स्तर पर पारदर्शिता और निष्पक्षता से समझौता न हो। साथ ही स्थानीय प्रशासन को यह भी कहा गया है कि ग्रामीणों के बीच किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति उत्पन्न न होने पाए और समय-समय पर आवश्यक जानकारी सार्वजनिक की जाए।

बिहार सरकार के इस निर्णय को ग्रामीण प्रशासनिक ढांचे में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में जिलों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर नए ग्राम पंचायतों के गठन और परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इससे राज्य की पंचायत व्यवस्था को अधिक संतुलित, प्रभावी और जनसंख्या के अनुरूप बनाने का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।

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