लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के नगरीय निकायों में रहने वाले लाखों संपत्ति स्वामियों को बड़ी राहत देते हुए प्रॉपर्टी टैक्स (गृहकर, जलकर और सीवरकर) के बकायेदारों के लिए पहली बार एकमुश्त समाधान योजना (One Time Settlement-OTS) लागू करने का फैसला किया है। इस योजना के तहत राज्य के सभी 762 नगरीय निकायों में बकाया कर जमा करने वाले करदाताओं को विशेष राहत दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य एक ओर नागरिकों को लंबित करों के भुगतान का आसान अवसर उपलब्ध कराना है, वहीं दूसरी ओर नगर निकायों की राजस्व वसूली को भी गति देना है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में बड़ी संख्या में ऐसे संपत्ति स्वामी हैं जिन पर वर्षों से गृहकर, जलकर और सीवरकर का बकाया चला आ रहा है। समय पर कर जमा न होने के कारण इन पर अधिभार, ब्याज और अन्य देनदारियां भी बढ़ती गईं, जिससे कई करदाताओं के लिए पूरा बकाया एक साथ चुकाना कठिन हो गया। इसी स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने पहली बार सभी नगरीय निकायों में एक समान ओटीएस योजना लागू करने का निर्णय लिया है।
इस योजना के लागू होने के बाद करदाता निर्धारित अवधि के भीतर अपना बकाया कर एकमुश्त जमा कर विशेष छूट का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे लंबे समय से लंबित कर मामलों का निस्तारण होगा और नागरिकों को कानूनी कार्रवाई तथा अतिरिक्त वित्तीय भार से भी राहत मिलेगी। साथ ही नगर निकायों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, जिससे स्थानीय विकास कार्यों को गति मिलेगी।
नगर विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में पहली बार इतनी व्यापक स्तर पर ओटीएस योजना लागू की जा रही है। अब तक अलग-अलग नगर निकाय अपने स्तर पर सीमित राहत योजनाएं लागू करते रहे हैं, लेकिन इस बार पूरे प्रदेश के सभी 762 नगरीय निकायों को एक ही नीति के तहत शामिल किया गया है। इससे राज्यभर में एक समान व्यवस्था लागू होगी और सभी पात्र करदाताओं को समान अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि नगर निकायों की आय का सबसे बड़ा स्रोत संपत्ति कर होता है। इसी राजस्व से सड़क, पेयजल, सीवर, स्ट्रीट लाइट, सफाई, पार्क, नाली निर्माण और अन्य शहरी विकास कार्य संचालित किए जाते हैं। बड़ी मात्रा में कर बकाया रहने से नगर निकायों के विकास कार्य प्रभावित होते हैं। ऐसे में ओटीएस योजना न केवल करदाताओं के लिए राहत लेकर आएगी, बल्कि स्थानीय निकायों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सरकार का यह भी मानना है कि कई मामलों में करदाता आर्थिक कठिनाइयों या बढ़ते अधिभार के कारण बकाया जमा नहीं कर पाते। परिणामस्वरूप वर्षों तक कर लंबित रहता है और राशि लगातार बढ़ती जाती है। एकमुश्त समाधान योजना ऐसे करदाताओं को बिना लंबे विवाद के बकाया निपटाने का अवसर प्रदान करेगी। इससे राजस्व वसूली की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनेगी।
सूत्रों के अनुसार, योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द ही नगर विकास विभाग द्वारा जारी किए जाएंगे। इनमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि योजना की अवधि क्या होगी, किन करदाताओं को इसका लाभ मिलेगा, किस प्रकार की छूट दी जाएगी तथा आवेदन और भुगतान की प्रक्रिया क्या होगी। सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक निर्देश भी जारी किए जाएंगे।
नगर निकायों के अधिकारियों का कहना है कि योजना लागू होने के बाद व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक करदाता इसका लाभ उठा सकें। इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। साथ ही हेल्प डेस्क और विशेष शिविर भी लगाए जा सकते हैं, जहां नागरिकों को उनके बकाया कर और योजना के लाभ की जानकारी दी जाएगी।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में करदाता इस योजना का लाभ उठाते हैं तो नगर निकायों को हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है। इससे शहरों में बुनियादी सुविधाओं के विकास, स्वच्छता, पेयजल, सीवर नेटवर्क, सड़क निर्माण और अन्य शहरी परियोजनाओं को नई गति मिलेगी। वहीं करदाताओं को भी लंबे समय से लंबित देनदारियों से राहत मिल सकेगी।
उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय राज्य के शहरी क्षेत्रों के लाखों संपत्ति स्वामियों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। पहली बार पूरे प्रदेश के 762 नगरीय निकायों में लागू की जा रही एकमुश्त समाधान योजना (OTS) से एक ओर करदाताओं को बकाया कर निपटाने का आसान अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर नगर निकायों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से शहरी विकास परियोजनाओं को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। अब सभी की नजर योजना के विस्तृत दिशा-निर्देशों और इसके क्रियान्वयन की समय-सीमा पर टिकी हुई है।
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