संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता को लेकर रूस ने एक बार फिर समर्थन जताया है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि सुरक्षा परिषद में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया।
लावरोव ने सुरक्षा परिषद में पश्चिमी देशों की अतिरिक्त स्थायी सीटों को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने जर्मनी और जापान का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए उनकी नीतियों पर सवाल उठाए। साथ ही रूस ने कहा कि UNSC में सुधार के दौरान मौजूदा पांच स्थायी सदस्यों के अधिकार और शक्तियां कम नहीं की जानी चाहिए।
15 सदस्यों की है सुरक्षा परिषद
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन पांच स्थायी सदस्य हैं। इन देशों के पास वीटो पावर है। बाकी 10 सदस्य गैर-स्थायी होते हैं, जिन्हें दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है।
भारत अब तक सुरक्षा परिषद का 8 बार अस्थायी सदस्य रह चुका है। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद के मौजूदा ढांचे में बदलाव और स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है।
भारत की दावेदारी के पीछे कई आधार
भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी उसकी भूमिका लगातार बढ़ी है। भारत परमाणु शक्ति संपन्न देश होने के साथ संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न अभियानों और बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।
भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील लंबे समय से सुरक्षा परिषद के विस्तार की मांग को लेकर G4 समूह के तहत साथ हैं। वहीं, कुछ देशों का समूह नए स्थायी सदस्यों को शामिल करने के बजाय गैर-स्थायी सीटों की संख्या बढ़ाने की वकालत करता है।
भारत की स्थायी सदस्यता में कौन-कौन सी चुनौतियां?
चीन का रुख: भारत की स्थायी सदस्यता पर चीन का समर्थन हासिल करना महत्वपूर्ण माना जाता है। दोनों देशों के बीच कई रणनीतिक और क्षेत्रीय मुद्दों पर मतभेद हैं।
अफ्रीकी प्रतिनिधित्व: अफ्रीकी देशों को सुरक्षा परिषद में ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की मांग भी सुधार प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। सीटों की संख्या और उनके स्वरूप को लेकर अभी सहमति नहीं बनी है।
वीटो पावर: नए स्थायी सदस्यों को वीटो अधिकार मिलेगा या नहीं, यह भी बड़ा सवाल है। मौजूदा पांच स्थायी सदस्य अपने वर्तमान अधिकारों को बनाए रखने के पक्ष में हैं।
सदस्य देशों की सहमति: सुरक्षा परिषद के ढांचे में बदलाव के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन करना होगा। इसके लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत और सदस्य देशों की आवश्यक मंजूरी जरूरी होगी।
भारत पहले चीन की UNSC सदस्यता का कर चुका है समर्थन
भारत और चीन के बीच आज सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता को लेकर अलग-अलग रुख दिखाई देता है। हालांकि, इतिहास में भारत ने चीन के संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद में प्रतिनिधित्व का समर्थन किया था।
1950 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू चीन को संयुक्त राष्ट्र में शामिल किए जाने के पक्ष में थे। बाद में भारत को स्थायी सीट का प्रस्ताव मिलने और उसे चीन के लिए छोड़ने से जुड़ा दावा भी सामने आया था। हालांकि, नेहरू ने संसद में कहा था कि भारत को ऐसी सदस्यता का कोई औपचारिक या अनौपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला था।
UNSC में सुधार को लेकर 2026 में भी बातचीत जारी है, लेकिन नए स्थायी सदस्यों और वीटो अधिकारों के मुद्दे पर सदस्य देशों के बीच अभी अंतिम सहमति नहीं बन पाई है।
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