त्रिवेणीगंज (सुपौल)। बिहार के सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज प्रखंड अंतर्गत मिरजावा पंचायत के वार्ड संख्या 10 स्थित मध्य विद्यालय मिरजावा में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) खाने के कुछ ही देर बाद कई स्कूली बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ने लगी। बच्चों को उल्टी, पेट दर्द, घबराहट और बेचैनी जैसी शिकायतें होने लगीं, जिससे विद्यालय परिसर में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही विद्यालय प्रशासन, स्थानीय ग्रामीण और शिक्षा विभाग के अधिकारी सक्रिय हो गए। प्रभावित बच्चों को तत्काल स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार शुरू किया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विद्यालय में निर्धारित समय पर बच्चों को नियमित रूप से मध्याह्न भोजन परोसा गया था। भोजन करने के कुछ समय बाद कई बच्चों ने पेट में तेज दर्द, मतली और चक्कर आने की शिकायत की। देखते ही देखते कुछ अन्य बच्चों की तबीयत भी बिगड़ने लगी। एक साथ कई बच्चों के बीमार पड़ने से शिक्षकों और विद्यालय कर्मियों के बीच अफरा-तफरी मच गई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विद्यालय प्रशासन ने तत्काल अभिभावकों और स्थानीय प्रशासन को सूचना दी। इसके बाद ग्रामीणों की मदद से बच्चों को एंबुलेंस तथा अन्य उपलब्ध वाहनों के माध्यम से नजदीकी सरकारी अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने बच्चों का प्राथमिक उपचार शुरू किया और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार निगरानी रखी।
घटना की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम भी अस्पताल पहुंच गई। डॉक्टरों ने सभी बच्चों की चिकित्सीय जांच कर आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराईं। चिकित्सकों के अनुसार, अधिकांश बच्चों की स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, हालांकि सभी को एहतियात के तौर पर चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
उधर, घटना की सूचना मिलते ही शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भी विद्यालय पहुंचे। अधिकारियों ने विद्यालय की रसोई, खाद्यान्न भंडारण व्यवस्था, भोजन तैयार करने की प्रक्रिया तथा स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। प्रशासन ने मिड-डे मील में उपयोग किए गए खाद्य पदार्थों के नमूने सुरक्षित कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि बच्चों की तबीयत बिगड़ने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
प्राथमिक जांच में प्रशासन सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रहा है। यह देखा जा रहा है कि भोजन की गुणवत्ता, खाद्य सामग्री की ताजगी, पानी की शुद्धता अथवा भोजन बनाने की प्रक्रिया में कहीं कोई लापरवाही तो नहीं हुई। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट रूप से बताया जा सकेगा कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने का वास्तविक कारण क्या था।
घटना के बाद विद्यालय पहुंचे अभिभावकों में भारी चिंता और नाराजगी देखने को मिली। कई अभिभावकों ने विद्यालय में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
स्थानीय प्रशासन ने अभिभावकों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए आश्वासन दिया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों या भोजन आपूर्ति से जुड़े जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग ने भी इस घटना को गंभीरता से लिया है। विभागीय अधिकारियों ने विद्यालय प्रशासन से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही जिले के अन्य विद्यालयों में भी मिड-डे मील की गुणवत्ता, खाद्यान्न भंडारण और भोजन तैयार करने की व्यवस्था की जांच के निर्देश दिए जा सकते हैं, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना, उनकी पोषण स्थिति में सुधार लाना तथा विद्यालयों में उपस्थिति बढ़ाना है। ऐसे में इस प्रकार की घटनाएं न केवल बच्चों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय हैं, बल्कि योजना की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, जिससे बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
फिलहाल सभी प्रभावित बच्चों का उपचार जारी है और अधिकांश की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। प्रशासन ने कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा होगा। यदि किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी। पूरे मामले पर जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग की संयुक्त निगरानी बनी हुई है।
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