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ओपी राजभर का अखिलेश यादव पर निशाना, कुर्मी समाज को लेकर लगाए गंभीर आरोप

लखनऊ। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी राजभर ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। राजभर ने आरोप लगाया कि प्रदेश में गैर-यादव पिछड़े वर्ग, खासकर कुर्मी समाज के लोगों को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है।

राजभर ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि आखिर उन्हें कुर्मी समाज से इतनी नाराजगी क्यों है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा से जुड़े कुछ लोग गैर-यादव पिछड़ों के खिलाफ माहौल बनाने और उन्हें परेशान करने का काम कर रहे हैं।

जानकीपुरम की घटना का किया जिक्र

ओपी राजभर ने लखनऊ के जानकीपुरम क्षेत्र से जुड़े एक मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व पार्षद एवं सपा की लोहिया वाहिनी के प्रदेश उपाध्यक्ष चांद सिद्दीकी समेत कुछ लोग स्कॉर्पियो से भरत वर्मा की जमीन पर पहुंचे। राजभर के अनुसार, वहां बाउंड्री पिलर तोड़ने, गाली-गलौज और हवाई फायरिंग जैसी घटनाओं के आरोप लगाए गए हैं।

राजभर ने दावा किया कि इस तरह की घटनाओं को राजनीतिक संरक्षण मिलने की वजह से बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि मामले में अब कार्रवाई शुरू हो चुकी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाया जाएगा।

‘राजनीतिक संरक्षण में नहीं बचेंगे आरोपी’

सुभासपा अध्यक्ष ने सपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था के मामले में किसी भी तरह का राजनीतिक दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों द्वारा अपने समर्थकों का इस्तेमाल करने के बाद मुश्किल समय में उन्हें अकेला छोड़ दिया जाता है।

राजभर ने कहा कि गैर-यादव पिछड़े समाज को अब ऐसी राजनीति को समझने की जरूरत है। उन्होंने विशेष रूप से कुर्मी समाज के लोगों के साथ किसी भी प्रकार की ज्यादती को बर्दाश्त नहीं करने की बात कही।

‘सैफई सिंडिकेट’ पर भी साधा निशाना

ओपी राजभर ने अखिलेश यादव की राजनीतिक शैली पर सवाल उठाते हुए ‘सैफई सिंडिकेट’ शब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की राजनीति में कार्यकर्ताओं और समर्थकों का इस्तेमाल किया जाता है और संकट आने पर उन्हें अकेला छोड़ दिया जाता है।

हालांकि, राजभर की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोपों और जानकीपुरम मामले में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में वास्तविक स्थिति संबंधित जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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