लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों के लिए मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना 26 जुलाई से शुरू होने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगरा स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस महत्वाकांक्षी योजना का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। मुख्य कार्यक्रम के साथ ही प्रदेश के सभी जिलों में भी समारोह आयोजित किए जाएंगे, जहां स्थानीय स्तर पर शिक्षकों को योजना से संबंधित जानकारी दी जाएगी।
कैशलेस चिकित्सा योजना लागू होने के बाद उच्च शिक्षा विभाग के पात्र शिक्षकों को गंभीर बीमारी, आकस्मिक उपचार और अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में तत्काल आर्थिक दबाव से राहत मिलने की उम्मीद है। योजना के तहत शिक्षक निर्धारित अस्पतालों में नियमानुसार बिना अग्रिम नकद भुगतान के उपचार की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए आवश्यक पहचान, पात्रता और उपचार से संबंधित प्रक्रिया को विभागीय स्तर पर व्यवस्थित किया जा रहा है।
राज्य सरकार का उद्देश्य शिक्षकों और उनके परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुरक्षा उपलब्ध कराना है। लंबे समय से उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़े शिक्षक संगठनों की ओर से कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मांग उठाई जाती रही थी। उपचार पर होने वाले भारी खर्च और चिकित्सा प्रतिपूर्ति में लगने वाले समय के कारण शिक्षकों को कई बार आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता था। नई योजना के लागू होने से इस समस्या के काफी हद तक दूर होने की संभावना जताई जा रही है।
आगरा के डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर में आयोजित होने वाले मुख्य समारोह को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षक प्रतिनिधि और अन्य संबंधित अधिकारी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री योजना का शुभारंभ करने के साथ शिक्षकों को उपलब्ध कराई जाने वाली चिकित्सा सुविधाओं और सरकार की शिक्षा संबंधी प्राथमिकताओं पर भी अपने विचार रख सकते हैं।
इसी दिन प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में विश्वविद्यालयों, राजकीय महाविद्यालयों और सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षकों की भागीदारी सुनिश्चित करने की तैयारी की जा रही है। जिला स्तर के आयोजनों में योजना के लाभ, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, अस्पतालों की व्यवस्था और उपचार से जुड़े आवश्यक नियमों की जानकारी दी जाएगी।
उच्च शिक्षा विभाग ने संबंधित संस्थानों और अधिकारियों को कार्यक्रम की तैयारियां समय से पूरी करने के निर्देश दिए हैं। शिक्षकों का विवरण अपडेट करने, पात्र लाभार्थियों का सत्यापन करने और योजना से जुड़ी तकनीकी व्यवस्थाओं को सुचारु बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विभाग का प्रयास है कि योजना शुरू होने के बाद किसी भी पात्र शिक्षक को प्रक्रिया संबंधी कठिनाई का सामना न करना पड़े।
कैशलेस चिकित्सा सुविधा के अंतर्गत उपचार की स्वीकृति, अस्पताल में भर्ती और भुगतान से जुड़ी व्यवस्था ऑनलाइन माध्यम से संचालित किए जाने की संभावना है। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और चिकित्सा दावों के निस्तारण में लगने वाला समय भी कम होगा। शिक्षकों को योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित पोर्टल, पहचान पत्र या अन्य विभागीय दस्तावेजों का उपयोग करना पड़ सकता है।
अब तक कई सरकारी कर्मचारियों और विभिन्न विभागों के कार्मिकों के लिए अलग-अलग चिकित्सा सहायता तथा प्रतिपूर्ति की व्यवस्थाएं लागू रही हैं। उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए विशेष कैशलेस योजना शुरू होने से उन्हें उपचार के समय पहले धन की व्यवस्था करने और बाद में प्रतिपूर्ति के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरने की समस्या से राहत मिल सकती है।
शिक्षक संगठनों ने योजना के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए इसे लंबे समय से लंबित मांग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा समय पर मिलना अत्यंत जरूरी है। कैशलेस व्यवस्था लागू होने से शिक्षक बिना आर्थिक चिंता के तत्काल उपचार करा सकेंगे।
हालांकि, योजना की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि अस्पतालों का नेटवर्क कितना व्यापक रखा जाता है और उपचार की अनुमति देने की प्रक्रिया कितनी सरल होती है। शिक्षकों का कहना है कि प्रदेश के सभी जिलों में पर्याप्त संख्या में अच्छे सरकारी और निजी अस्पतालों को योजना से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों को भी आसानी से इसका लाभ मिल सके।
योजना में गंभीर बीमारियों के उपचार, ऑपरेशन, आपातकालीन चिकित्सा और अस्पताल में भर्ती होने जैसी सेवाओं को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है। उपचार की अधिकतम सीमा, परिवार के सदस्यों की पात्रता और किन-किन बीमारियों को शामिल किया जाएगा, इससे संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश विभाग की ओर से जारी किए जाने हैं।
उच्च शिक्षा विभाग ने जिला और संस्थान स्तर के अधिकारियों को शिक्षकों के बीच योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए हैं। हेल्प डेस्क, सूचना पुस्तिका और ऑनलाइन सहायता के माध्यम से लाभार्थियों की समस्याओं का समाधान करने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इससे आवेदन और उपचार के दौरान आने वाली तकनीकी या दस्तावेजी कठिनाइयों को समय रहते दूर किया जा सकेगा।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षक कल्याण से जुड़ी योजनाओं का सीधा असर शिक्षण व्यवस्था पर भी पड़ता है। चिकित्सा और सामाजिक सुरक्षा मजबूत होने से शिक्षक अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा सकते हैं। इससे शिक्षण संस्थानों में कार्य वातावरण बेहतर होने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार पर लगातार जोर देती रही है। कैशलेस चिकित्सा योजना को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से शिक्षकों को समय पर और बेहतर उपचार उपलब्ध होगा तथा चिकित्सा खर्च के कारण होने वाली आर्थिक परेशानी कम होगी।
फिलहाल 26 जुलाई को होने वाले शुभारंभ कार्यक्रम को लेकर उच्च शिक्षा विभाग और डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन तैयारियों में जुटा हुआ है। योजना लागू होने के बाद प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के हजारों शिक्षकों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। अब शिक्षकों की निगाहें विस्तृत दिशा-निर्देशों, अस्पतालों की सूची और पात्रता से संबंधित नियमों पर टिकी हैं, जिनके जारी होने के बाद योजना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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