जींद। देश में स्वच्छ ऊर्जा आधारित रेल परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही हाइड्रोजन ट्रेन को शुरुआती दिनों में यात्रियों का अपेक्षित प्रतिसाद नहीं मिल पा रहा है। सोमवार को जींद जंक्शन से दूसरे दिन भी केवल 20 यात्रियों ने हाइड्रोजन ट्रेन में यात्रा की। इससे पहले पहले दिन भी जींद स्टेशन से महज 20 यात्रियों ने ही इस ट्रेन का सफर किया था। लगातार दूसरे दिन भी यात्रियों की संख्या सीमित रहने से यह स्पष्ट है कि फिलहाल ट्रेन में भीड़ नहीं उमड़ रही है, हालांकि भारतीय रेलवे को विश्वास है कि आने वाले दिनों में लोगों की जागरूकता बढ़ने के साथ यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन देश में हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नई शुरुआत है। यह ट्रेन पारंपरिक डीजल ट्रेनों की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल मानी जा रही है और इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है। बावजूद इसके, शुरुआती दो दिनों में यात्रियों की संख्या उम्मीद से काफी कम रही है।
जींद जंक्शन पर सोमवार सुबह जब हाइड्रोजन ट्रेन अपने निर्धारित समय पर पहुंची, तो रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी के बीच यात्रियों की संख्या सीमित ही रही। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जींद स्टेशन से केवल 20 यात्रियों ने ट्रेन में सवार होकर यात्रा की। पहले दिन भी ठीक इतनी ही संख्या में यात्रियों ने इस नई तकनीक वाली ट्रेन का अनुभव लिया था।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि किसी भी नई सेवा के आरंभिक दिनों में यात्रियों की संख्या कम रहना असामान्य नहीं है। लोगों को नई सुविधा के बारे में जानकारी मिलने, उसके संचालन की नियमितता स्थापित होने और यात्रा अनुभव साझा होने के बाद धीरे-धीरे यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना रहती है। इसी कारण रेलवे फिलहाल शुरुआती आंकड़ों को लेकर चिंतित नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन आधुनिक तकनीक पर आधारित रेल परिवहन का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इसमें हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे बिजली उत्पन्न होती है और ट्रेन संचालित होती है। इस प्रक्रिया में प्रदूषणकारी धुएं के बजाय मुख्य रूप से जलवाष्प का उत्सर्जन होता है। यही कारण है कि इसे भविष्य के पर्यावरण अनुकूल परिवहन का महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल एक नई ट्रेन चलाना नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा आधारित रेल नेटवर्क की संभावनाओं का परीक्षण करना भी है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में देश के अन्य रेल मार्गों पर भी इस प्रकार की ट्रेनों का संचालन बढ़ाया जा सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी बड़ी संख्या में यात्रियों को हाइड्रोजन ट्रेन के समय, किराए, सुविधाओं और संचालन संबंधी जानकारी नहीं है। कई यात्री इसे देखने तो स्टेशन पहुंच रहे हैं, लेकिन नियमित यात्रा के लिए अभी सामान्य ट्रेनों का ही उपयोग कर रहे हैं। रेलवे को उम्मीद है कि प्रचार-प्रसार बढ़ने के साथ अधिक लोग इस नई तकनीक का अनुभव लेने के लिए आगे आएंगे।
रेल विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीक वाली किसी भी सार्वजनिक परिवहन सेवा को लोकप्रिय होने में समय लगता है। प्रारंभिक चरण में यात्रियों की संख्या कम होना सामान्य बात है। जैसे-जैसे लोगों का विश्वास बढ़ेगा और सेवा नियमित रूप से संचालित होगी, वैसे-वैसे इसका उपयोग भी बढ़ने लगेगा।
रेलवे प्रशासन ने संकेत दिया है कि हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। यात्रियों की प्रतिक्रिया, तकनीकी प्रदर्शन और परिचालन संबंधी सभी पहलुओं का मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तकनीक को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को लेकर रेलवे की महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल शुरुआती दौर में है। लगातार दूसरे दिन भी जींद जंक्शन से केवल 20 यात्रियों द्वारा यात्रा किए जाने से स्पष्ट है कि लोगों को इस नई सेवा से जुड़ने में अभी समय लग सकता है। हालांकि, रेलवे को भरोसा है कि जागरूकता बढ़ने, नियमित संचालन और पर्यावरण के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता के साथ आने वाले दिनों में हाइड्रोजन ट्रेन यात्रियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाएगी और इसकी लोकप्रियता में लगातार वृद्धि होगी।
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