सावन के दूसरे सोमवार को क्षेत्र में शिवभक्ति का माहौल देखने को मिला। गंगा जल लेकर लौट रहे कांवड़ियों की टोलियां सुबह से ही नाचते-गाते और भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए विभिन्न शिवालयों की ओर बढ़ती नजर आईं। कांवड़ियों के पहुंचने से मंदिरों के आसपास भक्तिमय वातावरण बन गया। हर तरफ ‘हर-हर महादेव’, ‘बम-बम भोले’ और ‘जय भोलेनाथ’ के जयकारे गूंजते रहे।
कांवड़िए गंगा से पवित्र जल लेकर सावन के दूसरे सोमवार को भगवान महादेव का जलाभिषेक करने के लिए अपने-अपने क्षेत्रों में पहुंचे। रास्ते में कांवड़ियों की टोलियां पूरे उत्साह और उमंग के साथ आगे बढ़ती रहीं। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने कांवड़ियों का स्वागत किया और उन्हें रास्ता देकर उनकी यात्रा को सुगम बनाने में सहयोग किया।
कांवड़ियों की टोली में शिवभक्ति का अलग ही रंग देखने को मिला। कोई भगवान शिव के रूप और वेशभूषा में नजर आया तो कोई ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों की धुन पर शिव नृत्य करता दिखाई दिया। कांवड़ियों के साथ चल रहे श्रद्धालु भी जयकारों और भजनों में शामिल होकर वातावरण को भक्तिमय बनाते रहे।
कांवड़ यात्रा के दौरान युवाओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। कांवड़िए पूरे रास्ते शिव नाम का जाप करते हुए आगे बढ़ते रहे। कई जगह लोगों ने कांवड़ियों के लिए पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था भी की। स्थानीय लोगों ने श्रद्धा के साथ कांवड़ियों का स्वागत करते हुए उनकी सेवा की।
शिवालयों में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। कांवड़ियों ने मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ का गंगाजल से जलाभिषेक किया और सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिरों में घंटियों की आवाज और शिवभक्तों के जयकारों से पूरा वातावरण शिवमय नजर आया।
सावन के दूसरे सोमवार पर कांवड़ यात्रा को लेकर लोगों में खासा उत्साह रहा। कांवड़ियों की टोलियों के गुजरने के दौरान सड़कें भी कुछ समय के लिए भक्तिमय माहौल में बदल गईं। शिवभक्ति में डूबे कांवड़ियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। देर तक विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का सिलसिला चलता रहा।
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