फतेहपुर। कद्दूवर्गीय सब्जियों में इन दिनों फल मक्खी के संभावित प्रकोप को देखते हुए उद्यान विभाग ने किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने और समेकित कीट प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है। जिला उद्यान अधिकारी डॉ. रमेश पाठक ने लौकी, कद्दू, करेला, तोरई, खीरा, ककड़ी, खरबूजा सहित अन्य कद्दूवर्गीय फसलों के उत्पादक किसानों को फल मक्खी से बचाव की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि फल मक्खी कद्दूवर्गीय फसलों का प्रमुख हानिकारक कीट है। वयस्क मादा फल मक्खी कोमल एवं विकसित हो रहे फलों की त्वचा के नीचे अंडे देती है। अंडों से निकलने वाली सूंडियां फल के अंदर प्रवेश कर गूदे को नुकसान पहुंचाती हैं। इससे फल की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ-साथ बाजार योग्य उत्पादन में भी भारी कमी आ सकती है।
फल की सतह पर अंडे देने वाले स्थान पर छोटे सुईनुमा छेद या धब्बे दिखाई दे सकते हैं। बाद में प्रभावित स्थान पर भूरे या काले धब्बे पड़ने लगते हैं और फल धीरे-धीरे नरम होने लगता है। सूंडियां फल के अंदर सुरंग बनाकर गूदे को नुकसान पहुंचाती हैं। अधिक प्रकोप की स्थिति में फल सड़ने लगते हैं और उनमें दुर्गंध आने लगती है। छोटे अथवा विकसित हो रहे फल समय से पहले पीले होकर गिर सकते हैं।
प्रभावित फल बाजार में बिक्री योग्य नहीं रह जाते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। जिला उद्यान अधिकारी ने किसानों को सलाह दी कि फल लगने के समय से ही फसल का नियमित निरीक्षण करें और विशेष रूप से कोमल एवं विकसित हो रहे फलों की सतह पर नजर रखें।
फल मक्खी से प्रभावित, गिरे और सड़े हुए फलों को खेत में न छोड़ें। ऐसे फलों को एकत्र कर गहरे गड्ढे में दबा दें अथवा स्थानीय स्तर पर स्वीकृत सुरक्षित विधि से नष्ट करें। संक्रमित फलों को खुले में फेंकने से फल मक्खी का जीवन चक्र जारी रह सकता है।
फसल समाप्त होने के बाद खेत की गहरी जुताई करने की भी सलाह दी गई है, ताकि मिट्टी में मौजूद फल मक्खी के प्यूपा बाहर आ सकें और प्राकृतिक रूप से नष्ट हो सकें।
निगरानी एवं नियंत्रण के लिए प्रजाति-विशिष्ट आकर्षक ट्रैप और ल्योर का प्रयोग करने तथा विभागीय अनुशंसा के अनुसार इन्हें उचित संख्या और ऊंचाई पर लगाने को कहा गया है। कद्दूवर्गीय सब्जियों में फल मक्खी के यांत्रिक नियंत्रण के लिए क्यू-ल्योर फेरोमोन ट्रैप 15 से 20 ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से लगाने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा नीम सीड कर्नेल एक्सट्रैक्ट 3 से 5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। उद्यान विभाग ने किसानों से समय रहते फसल की निगरानी करने और अनुशंसित उपाय अपनाकर फल मक्खी के प्रकोप को नियंत्रित करने की अपील की है।
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