इटावा, 5 अगस्त। जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण को लेकर अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि नदियों को प्रदूषित करने और अपशिष्ट प्रबंधन में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बंद पड़े सीवेज उपचार संयंत्रों (एसटीपी), एमआरएफ केंद्रों तथा जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन की खराब व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला गंगा समिति, वृक्षारोपण समिति, पर्यावरण समिति एवं प्रदूषण संबंधी समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी ने करनपुरा स्थित 10.44 एमएलडी क्षमता के एसटीपी के बंद पाए जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संयंत्र बंद रहने से अशुद्ध जल सीधे नदी में प्रवाहित हो रहा है, जो गंभीर विषय है। उन्होंने अगले दो माह तक प्रतिदिन एसटीपी संचालन की फोटो एवं रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
मौजा उमरैन स्थित 13.5 एमएलडी क्षमता के सीवेज उपचार संयंत्र के भी बंद मिलने पर जिलाधिकारी ने कहा कि सरकार की ओर से भारी धनराशि खर्च किए जाने के बावजूद यदि गंदा पानी नदियों में जा रहा है तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोगों की आस्था और पर्यावरण के साथ खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बैठक में जिलाधिकारी ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बल्क वेस्ट जनरेटर्स, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों एवं अन्य अपशिष्ट उत्पादकों द्वारा नियमों का उल्लंघन किए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर उनकी विद्युत एवं जलापूर्ति भी बंद की जा सकती है।
प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी से उन्होंने पूछा कि प्रदूषण फैलाने वाले संस्थानों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने संबंधित अधिनियमों के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सिरसा नदी के पुनरुद्धार कार्यों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने राजस्व विभाग से सीमांकन कराकर आवश्यकतानुसार नदी का चौड़ीकरण कराने तथा अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए।
कामेथ, जसवंतनगर और भरथना के एमआरएफ केंद्रों पर विद्युत आपूर्ति एवं अपशिष्ट प्रसंस्करण कार्य बंद मिलने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए सभी केंद्रों को तत्काल संचालित करने और आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे की सर्विस रोड के किनारे बल्ब अपशिष्ट फेंके जाने के मामले में दोषियों के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। वहीं उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई के कूड़ा वाहनों द्वारा सड़क किनारे कचरा डाले जाने के मामले में भी कार्रवाई के आदेश दिए। नगर निकायों को कूड़ा वाहनों में पीछे से पूरी तरह बंद व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए ताकि परिवहन के दौरान कचरा सड़क पर न गिरे।
बैठक में जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन की समीक्षा के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल परिसर में फैली गंदगी पर भी जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए तत्काल प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी संजय कुमार सिंह, आईएएस कोमल पुनिया, अपर जिलाधिकारी बिपिन कुमार, नगर मजिस्ट्रेट राजेंद्र बहादुर, जिला विकास अधिकारी राकेश प्रसाद, उप कृषि निदेशक सतीश कुमार पांडेय, जिला विद्यालय निरीक्षक अतुल सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राजेश कुमार, उप जिलाधिकारी सदर मनोज पाठक, डीपीआरओ रोहित कुमार, नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी संतोष कुमार मिश्रा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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