बिजनौर। जिले में कांवड़ यात्रा के दौरान आपसी सम्मान, सौहार्द और इंसानियत की एक बेहद सकारात्मक मिसाल देखने को मिली। धार्मिक आस्था के बीच जब एक मुस्लिम व्यक्ति के जनाजे को सड़क पार कराना था, तो कांवड़ियों ने बिना किसी विवाद या हिचकिचाहट के कुछ देर के लिए अपनी यात्रा रोक दी। इस दौरान उन्होंने न केवल अपना कारवां थाम लिया, बल्कि डीजे की तेज आवाज भी तुरंत बंद कर दी, ताकि अंतिम यात्रा को पूरी गरिमा और शांति के साथ आगे बढ़ाया जा सके।
जानकारी के अनुसार, कांवड़ियों का एक बड़ा जत्था अपने निर्धारित धार्मिक मार्ग से गुजर रहा था। इसी दौरान स्थानीय स्तर पर एक जनाजे को सड़क के दूसरी ओर ले जाना था। स्थिति को देखते हुए मौके पर मौजूद लोगों ने कांवड़ियों से सहयोग की अपील की। बताया जाता है कि कांवड़ियों ने बिना किसी बहस या तनाव के तुरंत स्थिति को समझा और मानवता को प्राथमिकता देते हुए अपनी यात्रा रोक दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही जनाजे को रास्ता देने का समय आया, कांवड़ियों ने न केवल अपने कदम रोक दिए बल्कि डीजे की आवाज भी पूरी तरह बंद कर दी, जिससे पूरे माहौल में शांति और सम्मान का वातावरण बन गया। इसके बाद जनाजे को सुरक्षित और सम्मानपूर्वक सड़क पार कराया गया।
स्थानीय लोगों ने इस घटना को सामाजिक एकता और भाईचारे की मजबूत मिसाल बताया है। उनका कहना है कि धार्मिक यात्राओं के बीच इस तरह का आपसी सहयोग यह दर्शाता है कि आस्था के साथ-साथ इंसानियत भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोग कांवड़ियों के इस व्यवहार की जमकर सराहना कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे “गंगा-जमुनी तहजीब” की जीवंत झलक बताया है और कहा है कि ऐसे उदाहरण समाज में आपसी विश्वास और सौहार्द को और मजबूत करते हैं।
प्रशासनिक स्तर पर भी इस तरह की घटनाओं को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान भी शांति और सहयोग का माहौल बनाए रखा जा सकता है।
कुल मिलाकर, बिजनौर की यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि जब इंसानियत सबसे ऊपर रखी जाती है, तो हर धर्म और हर आस्था के बीच सम्मान और समझदारी का रास्ता खुद-ब-खुद बन जाता है।
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